Tu khud ki khoj me nikal...तू खुद की खोज में निकल - Man Ki Baat अभिव्यक्ति की आजादी

Breaking

Advertisements

Friday, 23 September 2016

Tu khud ki khoj me nikal...तू खुद की खोज में निकल

A Poem By Tanveer Ghazi


तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है
जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ न इन को वस्त्र तू .. (x२)
ये बेड़ियां पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
बना ले इनको शस्त्र तू
तू खुद की खोज में निकल



तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है
चरित्र जब पवित्र है
तोह क्यों है ये दशा तेरी .. (x२)
ये पापियों को हक़ नहीं
की ले परीक्षा तेरी
की ले परीक्षा तेरी
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है तू चल, तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
जला के भस्म कर उसे
जो क्रूरता का जाल है .. (x२)
तू आरती की लौ नहीं
तू क्रोध की मशाल है
तू क्रोध की मशाल है
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है
चूनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कपकाएगा .. (x२)
अगर तेरी चूनर गिरी
तोह एक भूकंप आएगा
तोह एक भूकंप आएगा
तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है, तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

लेखक – तनवीर ग़ाज़ी | Poetry: Tanveer Ghazi

13 comments:

  1. dear think before posting....writer is Tanveer Kazi not harivanshray bachchan

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद गजू जी जानकारी के लिए मैंने इस पोस्ट को ठीक कर लिया है

      Delete
  2. this is not a Harivansh rai bachchan's poem.
    it is written by tanveer ghazi.

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद प्रज्ज्वल साहू जी जानकारी के लिए मैंने इस पोस्ट को सुधर लिया है

      Delete
    2. It's haribansh rai's poem bro

      Delete
  3. This is not written by Harivansh Rai Bachchan

    ReplyDelete
  4. Rohit Kataria8 May 2018 at 20:06

    Lovely.

    ReplyDelete
  5. This Poem describes the current scenario of India where are sister,doughter,wife or mother are still going through the pain of molestation and sexual assault.

    ReplyDelete

Loading...